“The night has reached its end, and scattered is the gathering; / Never again shall you behold the nocturnal delight.”
रात ख़त्म हो गई और महफ़िल बिखर कर तितर-बितर हो गई। अब तुम रात का वह आनंद फिर कभी नहीं देख पाओगे।
यह शेर किसी महफ़िल के उजड़ने के ज़रिए ज़िंदगी के एक खूबसूरत दौर के हमेशा के लिए ख़त्म हो जाने का दर्द बयां करता है। रात का ढलना और महफ़िल का तितर-बितर होना केवल सुबह का होना नहीं, बल्कि उस आत्मीयता, रौनक और आनंद का हमेशा के लिए खो जाना है। शायर एक गहरी उदासी के साथ यह हक़ीक़त सामने रखता है कि ज़िंदगी के कुछ सुनहरे और जादुई लम्हे जब एक बार गुज़र जाते हैं, तो फिर कभी लौटकर नहीं आते।
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