“If in old age you would not wring your hands in deep regret, never let this malady in youth's eager heart be set.”
अगर बुढ़ापे में पछतावे से हाथ नहीं मलना चाहते, तो जवानी में कभी भी (इश्क़ का) यह रोग मत पालना।
शायर यहाँ एक हमदर्द दोस्त की तरह ज़िंदगी की सीख देते हुए इश्क़ को एक ऐसा 'रोग' बताते हैं, जो शुरू में तो दिलकश लगता है पर बाद में उम्र भर का दर्द बन जाता है। 'हाथ मलना' पछतावे और बेबसी का एक जीवंत मुहावरा है, जो ढलती उम्र में अधूरी तमन्नाओं के मलाल को दर्शाता है। यह शेर समझाता है कि जवानी के नासमझ जोश में पाला गया इश्क़ का दर्द बुढ़ापे में सिर्फ़ तन्हाई और अफ़सोस बनकर रह जाता है।
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