“All those who knew your true worth have now departed Delhi; do not ever diminish your esteem by lingering here.”
तुम्हारी क़द्र करने वाले सभी लोग दिल्ली छोड़कर जा चुके हैं, इसलिए अब यहाँ रहकर किसी भी हाल में अपनी क़ीमत मत खोना।
यह शेर दिल्ली के उजड़ने और उसकी कद्रदान तहज़ीब के बिखरने का बहुत गहरा दर्द बयान करता है। शायर खुद से या अपने जैसे किसी फनकार से कह रहा है कि जो लोग तुम्हारे हुनर और फन को पहचानते थे, वो तो अब यह शहर छोड़कर चले गए। ऐसी जगह रहकर अपने वकार और इज़्ज़त को कम मत करो जहाँ तुम्हारी कोई कद्र बाकी न रही हो।
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