है रिदा-ए-नेक-नामी दोश पर अपने मगर दाग़ रुस्वाई के कुछ ज़ेर-ए-रिदा पाते हैं हम

“Upon my shoulders rests the mantle of a good name, yet / Beneath this very cloak, stains of disgrace I find.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

हालाँकि हमारे कंधों पर नेकनामी की चादर है, मगर उस चादर के नीचे हम बदनामी के कुछ दाग़ पाते हैं।

विस्तार

यह शेर इंसान के बाहरी दिखावे और उसके अंदरूनी सच के द्वंद्व को बड़ी खूबसूरती से बयां करता है। दुनिया की नज़रों में तो हमने इज़्ज़त और नेक-नामी की चादर ओढ़ रखी है, लेकिन जब अपने भीतर झांकते हैं, तो उसी चादर के नीचे अपनी गलतियों और रुसवाइयों के दाग़ छिपे मिलते हैं। शायर बड़ी बेबाकी और सादगी से यह कबूल करता है कि कोई भी इंसान पूरी तरह बेदाग़ नहीं होता, भले ही ज़माना उसे कितना भी नेक समझे।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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