दिल में दर्द-ए-इश्क़ ने मुद्दत से कर रक्खा है घर पर उसे आलूदा-ए-हिर्स-ओ-हवा पाते हैं हम

“For ages has love's ache made my heart its home; yet stained with greed and fleeting desire, we find it still.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

इश्क़ के दर्द ने लंबे समय से दिल में अपना बसेरा बना रखा है, लेकिन हम उसे लालच और सांसारिक इच्छाओं से दूषित पाते हैं।

विस्तार

शायर यहाँ अपने दिल की एक दर्दभरी कशमकश को बड़े साफ़गोई से बयां कर रहे हैं। यूँ तो दिल में इश्क़ का दर्द बरसों से बसा हुआ है, जिसे बहुत पाक और मुक़द्दस माना जाता है; लेकिन अफ़सोस यह है कि वह अब दुनियावी लालच और मतलबी ख्वाहिशों की धूल से मैला हो चुका है। यह शेर हमारी इंसानी कमज़ोरी का आईना है, जहाँ हम सच्चे और बेग़रज़ प्यार की पाकीज़गी को अपनी हिर्स-ओ-हवा के चलते संभाल नहीं पाते।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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