हैं फ़िदा उन दोस्तों पर जिन में हो सिद्क़ ओ सफ़ा पर बहुत कम आप में सिद्क़ ओ सफ़ा पाते हैं हम

“I would give my life for friends whose hearts are pure and true; yet seldom is such truth and purity ever found in you.”

— अल्ताफ़ हुसैन हाली
अर्थ

हम ऐसे दोस्तों पर न्योछावर हैं जिनमें सच्चाई और निष्कपटता हो, लेकिन आप में हमें यह सच्चाई और पाकीज़गी बहुत कम नज़र आती है।

विस्तार

इस शेर में दोस्ती के उस गहरे दर्द और शिकवे को बयां किया गया है, जब किसी बेहद अज़ीज़ से उम्मीद टूटती है। शायर कहता है कि वह उन दोस्तों पर अपनी जान तक न्योछावर करने को तैयार है जिनके दिलों में सच्चाई और पाकीज़गी (सिद्क़ ओ सफ़ा) हो। मगर दूसरे ही मिसरे में वह बेहद नज़ाकत से अपने उस दोस्त को आईना दिखाता है कि अफ़सोस, जिसकी हमें सबसे ज़्यादा कद्र है, उसी में यह खुलूस सबसे कम नज़र आता है।

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