फ़ुसूँ है या दुआ है या मुअ'म्मा खुल नहीं सकता वो कुछ पढ़ते हुए आगे मिरे मदफ़न के बैठे हैं

“Is it a spell, a prayer, or an enigma none can divine? Murmuring something softly, they sit before this grave of mine.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

यह समझ में नहीं आ रहा कि यह कोई जादू है, दुआ है या कोई पहेली; वे मेरी क़ब्र के सामने बैठकर कुछ पढ़ रहे हैं।

विस्तार

इस शेर में एक बड़ा ही भावुक और रहस्यमयी मंज़र है, जहाँ महबूब आशिक़ की क़ब्र के पास बैठकर हौले-हौले कुछ पढ़ रहा है। क़ब्र में लेटा आशिक़ समझ नहीं पा रहा कि यह उसकी मग़फ़िरत की दुआ है, उस पर किया जाने वाला कोई जादू, या फिर उनकी मोहब्बत की कोई अनसुलझी पहेली। यह शेर बड़ी नफ़ासत से दिखाता है कि इश्क़ की कशमकश और महबूब का तिलिस्म मौत की सरहद पार करने के बाद भी ख़त्म नहीं होता।

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