“Regret lingers on both sides for the severing of our ties; was the folly mine, or was the foolishness yours?”
मेल-जोल और रिश्ते खत्म होने पर दोनों तरफ अफ़सोस है; न जाने यह नादानी हमसे हुई थी या तुमसे।
यह शेर रिश्ते टूटने के बाद के उस ख़ामोश दर्द को छूता है, जहाँ कड़वाहट की जगह सिर्फ़ एक गहरा पछतावा बचा रह जाता है। शायर यहाँ किसी पर इल्ज़ाम मढ़ने के बजाय बड़ी नरमी से सोच रहा है कि यह दूरी आख़िर किसकी नासमझी से पैदा हुई। यह बात दिल को छू जाती है कि कई बार ताल्लुक़ दुश्मनी से नहीं, बस नादानी और अनकहे जज़्बात की वजह से बिखर जाते हैं, जिसका अफ़सोस दोनों तरफ़ बराबर रहता है।
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