इब्तिदा से इंतिहा तक हाल उन से कह तो दूँ फ़िक्र ये है और जो कह कर पशेमानी हुई

“From beginning to end, I could reveal my state to her; yet I dread the deep regret that might follow once it is spoken.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मैं शुरुआत से लेकर अंत तक अपना सारा हाल उनसे कह तो दूँ, मगर चिंता यह है कि कहीं कहने के बाद मुझे पछतावा न हो।

विस्तार

यह शेर दिल के उस गहरे संकोच को छूता है जहाँ इंसान अपनी पूरी दास्तान, हर जज़्बा और हर दर्द महबूब के सामने खोलकर रख देना चाहता है। मगर ठीक इज़हार की दहलीज़ पर एक खामोश डर पैर बाँध लेता है—कहीं दिल का हाल कह देने के बाद उम्र भर का पछतावा न हाथ लगे। कभी-कभी अपने दर्द को सीने में छुपाए रखना, उसे ज़ाहिर करके बेक़द्र होने के ख़ौफ़ से कहीं ज़्यादा महफ़ूज़ लगता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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