एक दिन मिल के फिर नहीं मिलते
किस क़यामत की ये जुदाई है
“Meeting for but a day, they never meet again; what a doomsday of a separation is this!”
— दाग़ देहलवी
अर्थ
लोग सिर्फ़ एक दिन मिलकर फिर कभी नहीं मिलते, यह जुदाई कितनी भयानक और क़यामत जैसी है।
विस्तार
यह शेर उस तड़प को बयां करता है जहां किसी से बस एक रोज़ की मुलाक़ात ज़िंदगी भर की तन्हाई बन जाती है। वह एक दिन का मिलना दिल को खुशियों की महक तो दे गया, लेकिन उसके बाद की दूरी किसी क़यामत जैसी जानलेवा साबित हुई। शायर इसी बेबसी पर हैरान है कि भला इतना छोटा सा वस्ल इतनी बेइंतहा और दर्दनाक जुदाई का सबब कैसे बन गया।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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