“Wait not, O effect, for a prayer to plead; to ask and beg is sheer shamelessness indeed.”
ऐ असर! तू किसी दुआ का इंतज़ार मत कर, क्योंकि हाथ फैलाना और कुछ माँगना बहुत बड़ी बेशर्मी है।
इस शेर में शायर 'असर' यानी नतीजे से मुख़ातिब होकर कहता है कि वह किसी दुआ का इंतज़ार न करे, क्योंकि हाथ फैलाना या गिड़गिड़ाना स्वाभिमान के ख़िलाफ़ है। यहाँ आशिक़ की ग़ैरत और ख़ुद्दारी का एक अनूठा पहलू सामने आता है, जहाँ दिल दर्द सहना तो मंज़ूर कर लेता है मगर मिन्नतें करके अपनी इज़्ज़त नहीं गँवाना चाहता। शायर का मानना है कि सच्चा करम या तवज्जो वही है जो ख़ामोश तड़प को देखकर अपने-आप आ जाए, माँगने की ज़िल्लत उठाए बिना।
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