जानते जानते ही जानेगा मुझ में क्या है अभी वो क्या जाने

“Only through knowing will he come to truly know; what lies within me, how could he fathom as yet?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

वह धीरे-धीरे और वक्त के साथ ही मुझे समझ पाएगा; अभी वह भला क्या जाने कि मेरे भीतर क्या है।

विस्तार

यह शेर इंसान के भीतर छुपी अथाह गहराइयों और उसकी परतों की बात करता है। शायर बहुत सादगी से कहता है कि किसी को सरसरी नज़र से नहीं समझा जा सकता; उसके दिल के दर्द, ख़्वाबों और एहसासों को समझने के लिए वक़्त और क़ुरबत की ज़रूरत होती है। सामने वाला अभी तो सिर्फ़ ऊपरी सतह देख रहा है, रूह के असली भेद खुलना तो एक लंबा और धीमा सफ़र है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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