“Leaving you in the care of God, unfulfilled I depart; recite a prayer for my soul, if ever I cross your heart.”
हम आपको ईश्वर के हवाले करके अपनी अधूरी इच्छाओं के साथ जा रहे हैं; अगर कभी हमारी याद आए, तो हमारी मग़फ़िरत के लिए कोई दुआ पढ़ देना।
इस शेर में जुदाई का एक ऐसा मार्मिक मंज़र है जहाँ कोई शिकवा नहीं, बस एक गहरी और बावक़ार उदासी है। आशिक़ अपनी नाकामियों को स्वीकार करते हुए महबूब को ख़ुदा की अमान में सौंपकर रुख़्सत हो रहा है, मानो वह जीते-जी ही इस दुनिया से विदा ले रहा हो। उसकी आख़िरी ख़्वाहिश बस इतनी सी है कि अगर कभी बीते पलों में उसकी याद आ जाए, तो आंसुओं के बदले उसके हक में मग़फ़िरत की एक छोटी सी दुआ पढ़ ली जाए।
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