लालच अबस है दिल का तुम्हें वक़्त-ए-वापसीं ये माल वो नहीं कि जिसे छोड़ जाएँ हम

“Vain is your greed for my heart in this final hour; this is no treasure of a kind that I would leave behind.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

अंतिम समय में तुम्हें मेरे दिल का लालच करना व्यर्थ है; यह ऐसी दौलत नहीं है जिसे हम जाते वक्त पीछे छोड़ जाएँ।

विस्तार

शायर यहाँ ज़िंदगी के आख़िरी पहर में महबूब से बड़े नाज़ भरे अंदाज़ में कह रहा है कि मेरे दिल को पाने का तुम्हारा लालच अब बिल्कुल बेकार है। लोग इस दुनिया से रुख़सत होते वक़्त अपनी धन-दौलत यहीं छोड़ जाते हैं, मगर दिल कोई ऐसी चीज़ नहीं जिसे पीछे छोड़ दिया जाए। यह तो मोहब्बत और जज़्बात की वो अनमोल पूँजी है, जिसे आशिक़ अपने साथ अगली दुनिया में भी समेट कर ले जाएगा।

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