मुमकिन है ये कि वादे पर अपने वो आ भी जाए मुश्किल ये है कि आप में उस वक़्त आएँ हम

“It is quite possible that, true to their word, they might arrive; / The trouble is whether I shall be in my senses at that hour.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

यह मुमकिन है कि महबूब अपने वादे के मुताबिक आ भी जाए, लेकिन मुश्किल यह है कि उस वक्त हम अपने होश-ओ-हवास में होंगे या नहीं।

विस्तार

इस शेर में इंतज़ार की शिद्दत और उससे पैदा होने वाली बेखुदी को बड़े खूबसूरत अंदाज़ में बयां किया गया है। शायर मुस्कुराते हुए कहता है कि मुमकिन है महबूब अपने कहे पर खरा उतरे और मिलने आ भी जाए, लेकिन असली मुसीबत तो आशिक़ की है। इंतज़ार के उन्माद और तड़प ने उसकी सुध-बुध ऐसी खो दी है कि वस्ल के उस नाज़ुक लम्हे में अपने होश-ओ-हवास में रहना ही नामुमकिन लगता है।

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