“Severing the heads of friends, they place them right in view, then turn to strangers to ask, 'Upon whose life shall we swear our oath?'”
वे दोस्तों का सिर काटकर सामने रख देते हैं और फिर ग़ैरों से पूछते हैं कि हम किसकी क़सम खाएँ।
यह शेर अपनों के साथ किए जाने वाले धोखे और समाज के पाखंड पर एक गहरा और चुभता हुआ तंज़ है। शायर एक खौफ़नाक मंज़र खींचता है जहाँ कोई अपने ही वफ़ादार दोस्तों को क़त्ल कर देता है, और फिर अजनबियों के सामने अपनी सच्चाई साबित करने के लिए उन्हीं से पूछता है कि अब किसकी क़सम खाए। यह उस दोगलेपन का दर्द बयां करता है जहाँ लोग अपनों को तबाह करके भी दुनिया के सामने बेगुनाह और पाक-साफ़ दिखने का ढोंग करते हैं।
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