“I was not so entranced in beholding you as to ever regain my senses, yet your cold indifference has startled me awake.”
मैं आपके दीदार में इस तरह खोया हुआ था कि मुझे होश ही न आता, लेकिन आपकी बेरुखी और उपेक्षा ने मुझे सचेत कर दिया।
इस शेर में आशिक कहता है कि वह महबूब के दीदार में इस कदर खोया था कि खुद से कभी होश में आने की उम्मीद ही न थी। मगर महबूब की बेरुखी और अनदेखी (तग़ाफ़ुल) ने एक ऐसा गहरा झटका दिया कि वह सम्मोहन एक पल में टूट गया। यह उस चुभते हुए दर्द की दास्तान है, जहाँ प्यार के गहरे सुरूर को कोई नहीं तोड़ सका, लेकिन महबूब की सर्द खामोशी ने उसे अचानक हक़ीक़त की ज़मीन पर ला पटका।
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