“The rival and the art of love—truly a marvel of God! / Him, capable of devotion? How could you have ever believed it?”
रक़ीब और प्रेम का तौर-तरीक़ा, यह भी ईश्वर की अजीब माया है। वह और सच्चा प्यार, भला तुमने उसकी बात पर कैसे भरोसा कर लिया?
इस शेर में शायर रक़ीब यानी अपने प्रतिद्वंद्वी के इश्क़ के दिखावे पर गहरा तंज़ कस रहा है। वह हैरानी से कहता है कि रक़ीब जैसा पत्थरदिल इंसान और प्यार की नज़ाकत—यह तो बस खुदा की कोई अजीब कुदरत ही हो सकती है! आशिक को इस बात का गहरा मलाल है कि उसके सीधे-सादे महबूब ने उस फ़रेबी की चिकनी-चुपड़ी बातों पर इतनी आसानी से भरोसा कैसे कर लिया।
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