उन आँखों के क़ुर्बान जाऊँ जिन्हों ने हज़ारों हिजाबों में परवाना देखा

“I would surrender my life to those eyes that perceived the moth even through a thousand veils.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मैं उन आँखों पर न्योछावर जाऊँ जिन्होंने हज़ारों पर्दों के बीच भी परवाने को देख लिया।

विस्तार

यह शेर उस गहरी और पारखी नज़र की तारीफ़ करता है जो इंसान के दिल की छुपी हुई तड़प को फौरन पहचान लेती है। शायर उन आँखों पर न्योछावर होना चाहता है, जिन्होंने दुनिया के हज़ारों पर्दों और दूरियों के बावजूद आशिक़ (परवाने) के सच्चे और जलते हुए जज़्बे को देख लिया। यह उस रूहानी रिश्ते की बात है जहाँ सच्ची मोहब्बत किसी दिखावे की मोहताज नहीं होती, बल्कि खामोशी से रूह को पढ़ लेती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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