“Before the counselor, I never speak the truth; upon my tongue linger the hues of your own speech.”
मैं नसीहत देने वाले के सामने कभी सच नहीं बोलता, क्योंकि मेरी ज़ुबान पर तुम्हारी ही बातों का रंग चढ़ा हुआ है।
ग़ज़ल की दुनिया में 'नासेह' वह समझदार सलाहकार होता है, जो आशिक़ को दुनियादारी और सीधी-सच्ची बातें सिखाने आता है। मगर शायर मुस्कुराकर कहता है कि वह इस सलाहकार से सच कह ही नहीं पाता, क्योंकि उसकी ज़ुबान पर अब महबूब के अंदाज़ और उसकी शोखियों का असर छा चुका है। इश्क़ की ख़ूबसूरती यही है कि आशिक़ अपने माशूक़ में इतना खो जाता है कि उसकी बातें और बोलने का ढंग भी महबूब जैसा ही दिलकश और राज़दार बन जाता है।
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