क्या इज़्तिराब-ए-शौक़ ने मुझ को ख़जिल किया वो पूछते हैं कहिए इरादे कहाँ के हैं

“How the restless fever of yearning has brought me to deep shame— / She asks: 'Pray tell, towards what end do your intentions aim?'”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

मेरी तड़प और बेचैनी ने मुझे बहुत शर्मिंदा कर दिया, जब उन्होंने मुझसे पूछ लिया कि कहिए आपके इरादे क्या हैं।

विस्तार

यहाँ आशिक़ की बेताबी और दिल की बेचैनी ने सारा भेद खोल दिया है, जिससे वह महबूब के सामने शर्मिंदा हो गया। दिल की तड़प चेहरे और हरकतों से इतनी साफ़ झलक रही थी कि महबूब ने उसे ताड़ लिया और शरारत भरे लहज़े में पूछ बैठा—'कहिए, इरादे कहाँ के हैं?' यह शेर मोहब्बत की उस नाज़ुक लाचारी को दर्शाता है जहाँ लाख छुपाने पर भी दिल का राज़ ज़ाहिर हो जाता है।

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