“With every single breath, a cloud of dust rises from the heart; who knows of which passing caravan this road-dust is a part?”
हर सांस के साथ दिल से धूल या गुबार निकलने लगा है; न जाने रास्ते की यह धूल किस गुज़रते हुए कारवाँ की है।
इस शेर में दिल को एक ऐसी सुनसान सड़क की तरह दिखाया गया है जहाँ से कोई बड़ा कारवाँ गुज़र चुका हो। शायर महसूस करता है कि हर साँस के साथ सीने से दर्द का ग़ुबार उठ रहा है, मानो किसी बिछड़े हुए महबूब या पुरानी यादों के गुज़रने के बाद की धूल अब भी दिल में तैर रही हो। यह शेर दिल के वीरानेपन और कभी न मिटने वाली उदासी को बेहद नफ़ासत से बयां करता है।
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