“I ask of fate: in love, is there any remedy / Against the sudden, unforeseen strokes of cruelty?”
मैं तक़दीर से यह पूछ रहा हूँ कि क्या इश्क़ में अचानक आने वाली मुसीबतों और ज़ुल्म का कोई उपाय या हल है।
इस शेर में शायर तक़दीर से एक सीधा और दर्दभरा सवाल कर रहा है कि क्या इश्क़ में अचानक टूटने वाले सितम से बचने का कोई उपाय या तदबीर मौजूद है? यहाँ भाग्य (तक़दीर) और इंसानी कोशिश (तदबीर) के बीच का दर्दनाक खिंचाव साफ़ दिखाई देता है। यह शेर मोहब्बत की उस लाचारी को छूता है, जहाँ दिल पर अचानक वार होता है और इंसान की तमाम समझदारी धरी की धरी रह जाती है।
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