यूँ तो क्या आएगा तू फ़र्त-ए-नज़ाकत से यहाँ सख़्त दुश्वार है धोके में भी आना तेरा

“So extreme is your exquisite delicacy, you would never venture here; even to wander in by mistake, or be lured into coming, is far too difficult for you.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

अपनी अत्यधिक नज़ाकत के कारण तू जान-बूझकर तो यहाँ क्या आएगा, धोखे या भूल से भी तेरा यहाँ आना बेहद मुश्किल है।

विस्तार

यहाँ शायर महबूब की नाज़ुक-मिज़ाजी पर बड़े प्यार और शोख़ी से तंज़ कस रहा है। माशूक़ इतना कोमल और नफ़ीस है कि अपनी मर्ज़ी से चलकर यहाँ आने की ज़हमत तो वो कभी नहीं उठाएगा। मज़ा इस बात में है कि शायर 'धोके में आना' मुहावरे के साथ खेल रहा है—यानी तुम इतने होशियार और नाज़ुक हो कि न तो किसी के बहकावे में आ सकते हो, और न ही भूल-चूक से यहाँ क़दम रख सकते हो।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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