तू जो ऐ ज़ुल्फ़ परेशान रहा करती है किस के उजड़े हुए दिल में है ठिकाना तेरा

“O wayward tress, you who remain forever so distressed, in whose ruined, desolate heart does your dwelling rest?”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

ऐ ज़ुल्फ़, तू जो हमेशा बिखरी और परेशान रहती है, किस उजड़े हुए दिल में तेरा ठिकाना है?

विस्तार

शायर यहाँ 'परेशान' शब्द के खूबसूरत दोहरे अर्थ के साथ खेलते हैं—जिसका मतलब बिखरी हुई लटें भी है और व्याकुल या उदास मन भी। वे महबूब की उलझी जुल्फ़ों से पूछते हैं कि तुम्हारी इस बेचैनी का राज़ क्या है, क्या तुम किसी टूटे हुए आशिक़ के वीरान दिल में बसती हो? यह शेर हुस्न की नाज़ुक बेकरारी और इश्क़ की उदासी को बेहद अपनेपन के साथ एक सूत्र में पिरोता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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