“You are not God, O foolish preacher of mine; what fault was it of mine if I paid no heed to your word?”
ऐ नादान नसीहत करने वाले, तू मेरा ख़ुदा तो नहीं है; अगर मैंने तेरी बात नहीं मानी तो इसमें मेरा क्या क़सूर है?
इस शेर में आशिक़ उस नसीहत देने वाले (नासेह) को बड़े बेबाक और चुटीले अंदाज़ में जवाब देता है, जो उसे इश्क़ के रास्ते से हटाने की फ़िराक़ में है। वह साफ़ कहता है कि तुम महज़ एक इंसान हो, कोई ख़ुदा नहीं, इसलिए तुम्हारी बात न मानकर मैंने कोई गुनाह नहीं किया है। यह शेर दिल की आज़ादी और अक़्ल के बेतुके उसूलों पर इश्क़ की जीत का बेहद प्यारा इज़हार है।
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