काबा ओ दैर में या चश्म-ओ-दिल-ए-आशिक़ में इन्हीं दो-चार घरों में है ठिकाना तेरा

“In the Kaaba or the temple, or the lover's eye and heart— / In merely these few dwellings does your true abode reside.”

— दाग़ देहलवी
अर्थ

तुम्हारा ठिकाना बस इन्हीं दो-चार जगहों पर है—या तो काबा और मंदिर में, या फिर आशिक़ की आँखों और दिल में।

विस्तार

शायर यहाँ बड़ी नज़ाकत से कहता है कि इस असीम कायनात में ख़ुदा या महबूब का सच्चा ठिकाना आख़िर कहाँ है। दुनिया उन्हें काबे या मंदिर जैसी मुक़द्दस इबादतगाहों में तलाशती है, लेकिन शायर आशिक़ की भीगी आँखों और धड़कते दिल को भी उन्हीं के बराबर दर्जा देता है। इसका गहरा पैग़ाम यही है कि रूहानी मोहब्बत और रब सिर्फ़ पत्थरों की इमारतों में नहीं, बल्कि सच्चे दर्द और समर्पण से भरे दिल में बस्ते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.