उस से दिल-ए-तबाह की रूदाद क्या कहूँ जो ये न सुन सके कि ज़माना ख़राब है

“How can I tell the story of my ruined heart to one who cannot even bear to hear that the world has turned unkind?”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

मैं उस व्यक्ति को अपने तबाह दिल की दास्तान क्या सुनाऊँ, जो इतनी सी बात भी नहीं सुन सकता कि ज़माना ख़राब है।

विस्तार

शायर यहाँ एक बहुत ही नाज़ुक और तल्ख़ एहसास बयां कर रहे हैं। सोचिए, आप किसी ऐसे शख़्स से अपने टूटे हुए दिल का दर्द कैसे बांट सकते हैं, जो यह छोटी-सी बात भी बर्दाश्त नहीं कर सकता कि दुनिया कितनी ज़ालिम और मुश्किल है? जब कोई ज़िंदगी की आम कड़वाहटों को ही सुनने का हौसला नहीं रखता, तो उससे अपनी रूह की बर्बादी की दास्तान समझने की उम्मीद रखना सिर्फ़ दिल को तसल्ली देना है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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