दिन का क्या ज़िक्र तीरा-बख़्तों में एक रात आई एक रात गई

“Why speak of daylight among the dark-fated? One night arrived, and another night departed.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

बदकिस्मत लोगों के बीच दिन का ज़िक्र ही क्या करना; उनके लिए तो बस एक रात आती है और दूसरी रात बीत जाती है।

विस्तार

यह शेर बदकिस्मती और कभी न खत्म होने वाले ग़म की बड़ी मार्मिक तस्वीर खींचता है। शायर कहता है कि जिन बदनसीबों के मुक़द्दर में केवल स्याही लिखी हो, उनकी ज़िंदगी में दिन या उजाले की बात करना ही बेमानी है। उनके लिए वक़्त का गुज़रना बस ऐसा है मानो एक अंधेरी रात आई और दूसरी में ढल गई, जहाँ उम्मीद की कोई सुबह मुमकिन ही नहीं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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