हम ने भी वज़-ए-ग़म बदल डाली जब से वो तर्ज़-ए-इल्तिफ़ात गई

“Ever since that tender grace of yours was lost, I too transformed the very manner of my grief.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जब से आपका ध्यान और स्नेह दर्शाने का वह अंदाज़ ख़त्म हुआ, हमने भी अपने ग़म को सहने और ज़ाहिर करने का तरीक़ा बदल दिया।

विस्तार

इस शेर में टूटे दिल की उदासी के साथ-साथ एक गहरा आत्मसम्मान भी झलकता है। आशिक़ कहता है कि जब महबूब ने अपनी खास चाहत और तवज्जोह का अंदाज़ (तर्ज़-ए-इल्तिफ़ात) बदल लिया, तो उसने भी मातम और आहें भरने का पुराना तरीक़ा छोड़ दिया। अब ग़म को दुनिया के आगे ज़ाहिर करने के बजाय, उसने शायद ख़ामोशी और वक़ार के साथ सीने में छुपाना सीख लिया है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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