“Renouncing love is sound advice, counselor—but what if word of this should reach her ears?”
ऐ नसीहत देने वाले, मोहब्बत छोड़ देने का तुम्हारा मशवरा बिल्कुल सही है, लेकिन अगर यह बात महबूब तक पहुँच गई तो क्या होगा?
यहाँ आशिक़ अपने नासेह (सलाहकार) की बात पर मुस्कुराते हुए हामी भरता है कि प्यार का रास्ता छोड़ देना ही शायद अक़्लमंदी है। मगर दूसरे ही मिसरे में एक बेहद मासूम और गहरा डर सामने आता है—अगर महबूब को ज़रा भी भनक लग गई कि मैंने उससे दूर जाने का सोचा भी, तो उसका क्या होगा? यह शेर दिखाता है कि इश्क़ में दुनिया भर की दलीलें और समझदारी महबूब के रूठ जाने के एक छोटे से ख़ौफ़ के आगे पानी भरती नज़र आती हैं।
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