जब कोई ज़िक्र-ए-गर्दिश-ए-अय्याम आ गया बे-इख़्तियार लब पे तिरा नाम आ गया

“Whenever mention arose of the cruel turning of the days, involuntarily, upon my lips, your name found its way.”

— जिगर मुरादाबादी
अर्थ

जब भी ज़माने के बुरे वक़्त या गर्दिशों का ज़िक्र हुआ, अनायास ही मेरे होंठों पर तुम्हारा नाम आ गया।

विस्तार

यहाँ शायर ज़िंदगी के मुश्किल दौर और वक़्त के बेरहम थपेड़ों ('गर्दिश-ए-अय्याम') को अपने महबूब की याद से जोड़ता है। जब भी ज़माने के दुखों और गर्दिशों का ज़िक्र छिड़ता है, तो दिल बेबस हो जाता है और बे-इख़्तियार महबूब का नाम होंठों पर आ जाता है। यह शेर इस गहरे दर्द को दिखाता है कि जुदाई चाहे कितनी भी पुरानी हो, आशिक़ के लिए ज़िंदगी की हर मुसीबत का सबसे बड़ा चेहरा महबूब ही रहता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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जब कोई ज़िक्र-ए-गर्दिश-ए-अय्याम आ गया | Sukhan AI