निकल आए हैं हर इक़रार में इंकार के पहलू बना देती हैं हैराँ तेरी बातें मक्र याँ हो कर

“In every affirmation, facets of denial appear; turned to deceit, your words leave me bewildered here.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

तुम्हारे हर इक़रार में इनकार के पहलू नज़र आने लगे हैं, और तुम्हारी बातें यहाँ फ़रेब बनकर मुझे हैरान कर देती हैं।

विस्तार

क्या आपने कभी किसी की 'हाँ' में छिपी हुई साफ़ 'ना' को महसूस किया है? इस शेर में शायर महबूब के उसी मीठे फ़रेब का दर्द बयां कर रहा है, जहाँ हर इक़रार और वादे के पीछे इनकार का पहलू झाँकता है। महबूब की यह चालाकी और उलझी हुई बातें दिल को तसल्ली देने के बजाय गहरी हैरानी में डाल देती हैं, जहाँ सच और दिखावे की सीमा मिट जाती है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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