“The restraint of grief has so throttled my throat that it is hard for the sound of a broken heart to escape my lips as a cry of lament.”
ग़म को दबाने की कोशिश ने गला इस तरह घोंट दिया है कि दिल के टूटने की आवाज़ भी फ़रियाद या चीख़ बनकर मुँह से बाहर नहीं निकल पा रही है।
यहाँ शायर दर्द को दबाए रखने की उस इंतहा को बयां कर रहे हैं जहाँ इंसान का अपना ही सब्र उसका गला घोंटने लगता है। दिल अंदर से टूटकर बिखर चुका है, लेकिन ग़म को छुपाने की मजबूरी ऐसी है कि उस टूटन की आवाज़ भी लबों तक आकर फ़रियाद नहीं बन पाती। यह शेर हमें समझाता है कि कभी-कभी खुलकर रो न पाना और आंसुओं को अंदर ही क़ैद रखना, किसी भी चीख से ज़्यादा तकलीफ़देह होता है।
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