पता अंदेशा-ए-सालिक ने पाया मंज़िल-ए-दिल का तू पल्टा ला-मकाँ से आसमाँ-दर-आसमाँ हो कर

“The seeker's wandering thought at last found the dwelling of the heart, When from the spaceless realm You turned, descending sky through sky.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

साधक के विचार ने दिल की मंज़िल का पता तब पाया, जब तू ला-मकाँ (स्थान-रहित दुनिया) से एक-एक आसमान पार करते हुए वापस लौटा।

विस्तार

यह शे'र सूफ़ी फलसफ़े के उस गहरे सच को बयां करता है कि जिस खुदा को इंसान कायनात की असीम गहराइयों में तलाशता है, वह असल में उसके अपने दिल में ही बसता है। जब रूहानी रास्ते पर चलने वाले सालक की सोच ने तलाश पूरी की, तो पाया कि रब तो तमाम आसमानों और 'ला-मकां' यानी असीम दुनिया को पार करके इंसान के दिल में ही आकर ठहरता है। यानी जो हक़ीक़त पूरी कायनात में नहीं समा सकती, वह महज़ एक सच्चे दिल में समा जाती है।

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