तू एक ज़िल्ल-ए-हस्ती फिर कैसी ख़ुद-परस्ती साया की परवरिश है दामान-ए-बे-ख़ुदी में

“You are but a shadow of existence, whence then this self-adoration? A shadow finds its nurturing only in the lap of self-oblivion.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

तुम केवल अस्तित्व की एक परछाईं मात्र हो, फिर यह आत्म-पूजा और अहंकार कैसा? किसी साये का पालन-पोषण तो केवल बेख़ुदी (आत्म-विस्मृति) के आंचल में ही होता है।

विस्तार

शायर यहाँ इंसान को उसकी असलियत याद दिलाते हुए कहते हैं कि हमारा वजूद तो असल हक़ीक़त की बस एक परछाईं मात्र है, फिर यह अपने 'मैं' पर इतना नाज़ और ख़ुद-परस्ती कैसी? साए की अपनी कोई ज़ात या हुस्न नहीं होता, वह तो ख़ुद को मिटाकर ही अपने असल से जुड़ पाता है। इंसान का भी सच्चा सुकून और रूहानी निखार तब होता है जब वह अपने अहंकार को त्यागकर बे-ख़ुदी और तसलीम के दामन में आ जाए।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.