आँखें दिखा रही है दिन से मुझे शब-ए-ग़म आसार तीरगी के हैं दिन की रौशनी में

“The night of grief has glared at me since the break of day; signs of darkness now appear even in the sun's bright ray.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

ग़म की रात मुझे दिन से ही आँखें दिखा रही है, और दिन के उजाले में भी अंधेरे के आसार नज़र आ रहे हैं।

विस्तार

इस शेर में शायर ने 'शब-ए-ग़म' यानी दुख की रात को इंसानी रूप देकर कहा है कि वह शाम होने का इंतज़ार भी नहीं कर रही, बल्कि दिन के उजाले से ही उसे आँखें दिखाकर डरा रही है। यह उस गहरे मानसिक तनाव का बयान है जहाँ आने वाले दर्द का खौफ़ इतना हावी हो जाता है कि इंसान को भरी दोपहर में भी अंधेरा और मायूसी ही दिखाई देती है। जब दिल अंदर से बुझा हुआ हो, तो बाहर की कोई भी चमक उस उदासी को कम नहीं कर पाती।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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