हर उक़्दा में जहाँ के पोशीदा है कशाकश है मौज-ए-ख़ंदा-ए-गुल पिन्हाँ कली कली में

“In every knot of this world a restless struggle lies concealed; just as the wave of a rose's laughter sleeps within each budding flower.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

इस दुनिया की हर उलझन या गाँठ में एक कशमकश और खिंचाव छुपा हुआ है, ठीक वैसे ही जैसे हर कली के अंदर फूल के खिलने और मुस्कुराने की उमंग छिपी होती है।

विस्तार

शायर यहाँ ज़िंदगी की हर उलझन के भीतर छिपे संघर्ष और संभावना की बात कर रहे हैं। जिस तरह एक बंद कली के सीने में फूल के खिलने और मुस्कुराने की मौज छुपी होती है, ठीक वैसे ही दुनिया की हर गाँठ या मुश्किल के अंदर एक गहरी कशमकश दबी होती है। यह शेर हमें समझाता है कि हर बंदिश और तनाव के भीतर ही रूप और हुस्न के निखरने का राज़ छुपा है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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