सरा-ए-दहर में सोओगे ग़ाफ़िलो कब तक उठो तो क्या तुम्हें जाना नहीं वतन की तरफ़

“How long, O heedless ones, will you slumber in this worldly inn? Arise! Have you no journey left to take toward your true home?”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

हे लापरवाह लोगो, तुम इस दुनिया रूपी सराय में कब तक सोते रहोगे? उठो, क्या तुम्हें अपने असली वतन की ओर वापस नहीं जाना है?

विस्तार

शायर ने इस दुनिया को एक मुसाफ़िरख़ाने यानी 'सरा-ए-दहर' की तरह देखा है, जहाँ इंसान सिर्फ़ कुछ देर सुस्ताने आता है, हमेशा रहने नहीं। यहाँ 'सोना' दरअसल हमारी ग़फ़लत और दुनियावी मोह-माया में खो जाने का प्रतीक है। यह शेर एक दोस्त की तरह हमें झकझोर कर याद दिलाता है कि इस झूठी नींद से जागो, क्योंकि हम सबका असली ठिकाना यानी 'वतन' तो रूहानी दुनिया है जहाँ हमें आख़िरकार लौटना ही है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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