जान दे दे चल के दर पर यार के
ओ दिल-ए-बीमार क्यूँ कैसी कही
“Go, surrender your life at the beloved's threshold; O ailing heart, tell me, what say you to that?”
— नज़्म तबातबाई
अर्थ
जाकर महबूब की चौखट पर अपनी जान दे दे; ऐ बीमार दिल, बता यह विचार तुझे कैसा लगा?
विस्तार
इस शेर में आशिक़ अपने तड़पते हुए बीमार दिल से एक दोस्त की तरह गुफ़्तगू कर रहा है। वह कहता है कि रोज़-रोज़ इस हिज्र के दर्द में घुटने से तो बेहतर है कि महबूब की चौखट पर जाकर जान ही दे दी जाए। आख़िर में जिस बेबाक अंदाज़ में दिल से पूछा गया है—'क्यों, कैसी कही?'—वह इस गहरी लाचारी और दर्द में भी एक अनोखा, बेपरवाह अंदाज़ घोल देता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
ऑडियो
पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0
Free — just your email. You'll come right back here.
No comments yet. Be the first.
