हैं ये सब इक़रार झूटे या नहीं कीजिए इक़रार क्यूँ कैसी कही

“Are all these pledges false, or are they not? / But why would you confess—what foolish words I spoke!”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

शायर पूछता है कि क्या ये सारे वादे झूठे हैं या नहीं, फिर खुद ही कहता है कि भला आप यह बात क्यों स्वीकार करेंगे, मैंने भी यह कैसी बात कह दी।

विस्तार

इस खूबसूरत शेर में शायर अपने महबूब से शिकवा करते-करते खुद ही अपनी बात पर मुस्कुरा उठता है। वह पहले तो तड़पकर पूछता है कि क्या मोहब्बत के सारे वादे झूठे थे, पर अगले ही पल खुद को टोकता है कि भला महबूब अपनी गलती क्यों मानेगा! यहाँ 'इक़रार' शब्द का बड़ा प्यारा खेल है—एक तरफ प्यार का वादा और दूसरी तरफ सच कबूल करना; यही शोखी इस शेर की जान है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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