“Were you already displeased, or did a trifling thing provoke / Such a sudden shower of taunts, so sharp and fiercely spoke?”
क्या आप पहले से ही नाराज़ थे, या फिर ज़रा सी बात पर कड़वे वचनों और सवालों की ऐसी बौछार क्यों शुरू हो गई?
इस शेर में आशिक़ अपने महबूब के अचानक बदले हुए तीखे तेवरों और तानों से हैरान और आहत है। वह समझ नहीं पा रहा कि क्या महबूब पहले से ही किसी बात पर दिल में ख़फ़गी पाले हुए थे, या फिर किसी बेहद मामूली सी बात ने यह तूफ़ान खड़ा कर दिया। यहाँ 'बौछार' का बिम्ब यह ख़ूबसूरती से दिखाता है कि कड़वे बोल किस तरह अचानक बिन मौसम की तेज़ बारिश की तरह बरस पड़े, जिससे चाहने वाला अवाक रह गया।
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