सीखा हूँ मै-कदे में तरीक़-ए-फ़रोतनी जब तक कि सर है सज्दा-ए-शुकराना साथ है

“I learned in the tavern the gentle path of humility; as long as this head endures, a prostration of thanksgiving remains with me.”

— नज़्म तबातबाई
अर्थ

मैंने मयख़ाने में विनम्रता का तौर-तरीक़ा सीखा है; जब तक मेरा सिर सलामत है, तब तक कृतज्ञता का सजदा मेरे साथ रहेगा।

विस्तार

उर्दू शायरी में मै-कदा महज़ शराब पीने की जगह नहीं, बल्कि इश्क़-ए-हक़ीक़ी और रूहानी सुकून का वो ठिकाना है जहाँ इंसान का सारा अहंकार मिट जाता है। शायर कहता है कि उसने इसी मयख़ाने में बेख़ुदी और सच्ची आजिज़़ी (फ़रोतनी) का हुनर सीखा है। इस रूहानी नेमत के मिलने पर उसका दिल इतना शुक्रगुज़ार है कि जब तक उसका वजूद बाक़ी है, उसका सर हमेशा रब के शुक्राने के सजदे में ही झुका रहेगा।

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