ग़ज़ल

तन्हा नहीं हूँ गर दिल-ए-दीवाना साथ है

تنہا نہیں ہوں گر دل دیوانہ ساتھ ہے
नज़्म तबातबाई· Ghazal· 10 shers· radif: साथ है

यह ग़ज़ल इश्क़ की दीवानगी और तन्हाई के अनूठे एहसास को उजागर करती है, जहाँ आशिक़ अपने दीवाने दिल के साथ कभी अकेला महसूस नहीं करता। इसमें महबूब के जादुई हुस्न और उसके पीछे खिंचे चले आने वाले बेताब प्रेमियों के मेले का पुरअसर बयान है।

Source: rekhta · HI

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लिपि व अर्थ
1
तन्हा नहीं हूँ गर दिल-ए-दीवाना साथ है वो हर्ज़ा-गर्द हूँ कि परी-ख़ाना साथ है
अगर मेरा दीवाना दिल मेरे साथ है तो मैं अकेला नहीं हूँ; मैं ऐसा आवारा हूँ जिसके साथ परियों की पूरी दुनिया चलती है।
2
हंगामा इक परी की सवारी का देखना क्या धूम है कि सैकड़ों दीवाना साथ है
उस परी जैसी सुंदरी की सवारी का हंगामा तो देखिए, कैसी धूमधाम मची है कि सैकड़ों दीवाने आशिक़ उसके पीछे-पीछे चल रहे हैं।
3
दिल में हैं लाख तरह के हीले भरे हुए फिर मशवरा को आईना ओ शाना साथ है
दिल में पहले से ही लाखों तरह के बहाने और चालें भरी हुई हैं, फिर भी सलाह-मशवरे के लिए आईना और कंघी साथ रखे हुए हैं।
4
रोज़-ए-सियह में साथ कोई दे तो जानिए जब तक फ़रोग़-ए-शम्अ है परवाना साथ है
सच्चा साथ तो तब माना जाए जब कोई बुरे या कठिन दिनों में साथ दे, क्योंकि परवाना भी शमा के साथ तभी तक रहता है जब तक उसकी लौ चमकती है।
5
देता नहीं है साथ तही-दस्त का कोई जब तक कि मय है शीशे में पैमाना साथ है
खाली हाथ या गरीब इंसान का कोई साथ नहीं देता; पैमाना भी सुराही के साथ सिर्फ तभी तक रहता है जब तक कि उसमें शराब मौजूद हो।
6
सीखा हूँ मै-कदे में तरीक़-ए-फ़रोतनी जब तक कि सर है सज्दा-ए-शुकराना साथ है
मैंने मयख़ाने में विनम्रता का तौर-तरीक़ा सीखा है; जब तक मेरा सिर सलामत है, तब तक कृतज्ञता का सजदा मेरे साथ रहेगा।
7
जो बे-बसर हैं ढूँडते फिरते हैं दूर दूर और हर क़दम पे जल्वा-ए-जानाना साथ है
जो लोग दृष्टिहीन हैं वे महबूब को दूर-दूर तलाश करते फिरते हैं, जबकि हर क़दम पर महबूब की झलक उनके साथ मौजूद है।
8
क्या ख़ौफ़ हो हमें ज़न-ए-दुनिया के मक्र का अपनी मदद को हिम्मत-ए-मर्दाना साथ है
हमें इस दुनिया के छल-कपट का क्या डर हो सकता है, जब हमारी सहायता के लिए हमारा साहस और पौरुष हमारे साथ है।
9
ग़म की किताब से दिल-ए-सद-पारा कम नहीं जिस बज़्म में गए यही अफ़्साना साथ है
यह टुकड़ों में टूटा हुआ दिल किसी ग़म की किताब से कम नहीं है; हम जिस भी महफ़िल में गए, हमारे दुःखों की यही दास्तान हमेशा हमारे साथ रही।
10
मानिंद-ए-गर्द-बाद हूँ ख़ाना-ब-दोश मैं सहरा में हूँ मगर मिरा काशाना साथ है
मैं बवंडर की तरह एक खानाबदोश हूँ; यद्यपि मैं रेगिस्तान में भटक रहा हूँ, फिर भी मेरा घर हमेशा मेरे साथ रहता है।
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