“Mad is the one who does not bleed his veins in such a season, / When from the pulse of every rose bough surges a river of blood.”
वह व्यक्ति दीवाना है जो इस मौसम में अपनी फ़स्द (नस) न खुलवाए, क्योंकि फूल की हर शाखा की रग से ख़ून की नदी उबल रही है।
यह शेर बहार के मौसम के उस उन्माद और तीव्र जोश को दर्शाता है, जहाँ हर तरफ़ सुर्ख लाल गुलाब खिले हैं। शायर को डालियों में बहती लाली ऐसी दिखती है मानो कुदरत की अपनी रगों से लहू का दरिया उबल पड़ा हो। पुराने ज़माने में जुनून या जिस्मानी गर्मी को शांत करने के लिए नसों से ख़ून निकालने का रिवाज़ था; शायर कहता है कि इस दीवाने मौसम में जो अपने दिल के जुनून को बाहर बहने न दे, असल में वही सबसे बड़ा नासमझ है।
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