“In this world, one's gain is born of another's loss: for the shadow only widens as the sunlight fades.”
इस दुनिया में एक का लाभ दूसरे के नुक़सान से ही जुड़ा है, ठीक वैसे ही जैसे-जैसे धूप ढलती जाती है, साया फैलता जाता है।
शायर यहाँ दुनिया की एक गहरी और कड़वी सच्चाई को बड़े ख़ूबसूरत अंदाज़ में बयां कर रहे हैं कि किसी एक का फ़ायदा अक्सर दूसरे के नुक़सान से ही मुमकिन होता है। इस बात को समझाने के लिए वे धूप और छांव का स्वाभाविक उदाहरण देते हैं—जैसे-जैसे सूरज की धूप ढलती है, वैसे-वैसे साया लंबा और गहरा होता जाता है। यह शेर हमें याद दिलाता है कि ज़िंदगी में कामयाबी और तकलीफ़ का तराज़ू हमेशा एक-दूसरे से जुड़ा रहता है।
Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.
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