रश्क सूँ तुझ लबाँ की सुर्ख़ी पर जिगर-ए-लाला दाग़-दाग़ हुआ

“Envious of the deep crimson of your lips, the heart of the tulip was scarred through and through.”

— वली दकनी
अर्थ

तुम्हारे होंठों की लाली से ईर्ष्या के कारण लाला के फूल का जिगर दाग़-दाग़ हो गया।

विस्तार

उर्दू शायरी में लाला का फूल अपनी गहरी सुर्खी और अपने दरमियान मौजूद काले दाग़ के लिए मशहूर है। शायर यहाँ बड़ी नज़ाकत से कहता है कि लाला के सीने का यह दाग़ दरअसल महबूब के लाल होंठों को देखकर हुई ईर्ष्या और जलन की निशानी है। यह कुदरत की खूबसूरती पर महबूब के हुस्न की एक बेहद दिलकश और उम्दा जीत का इज़हार है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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