शायद कि दाम-ए-इश्क़ में ताज़ा हुआ है बंद वादे पे गुल-रुख़ाँ के जिसे ए'तिमाद है

“He must be newly trapped inside love's snare, / Who still puts faith in what the rose-faced swear.”

— वली दकनी
अर्थ

जिसे ख़ूबसूरत महबूबों के वादों पर अब भी यक़ीन है, वह ज़रूर इश्क़ के जाल में नया-नया फँसा होगा।

विस्तार

शायर यहाँ एक नए-नए आशिक़ की मासूमियत पर हल्की सी चुटकी ले रहा है। उसका कहना है कि जो भी महबूब के वादों पर अब भी आँख मूँद कर यक़ीन कर रहा है, वह ज़रूर इश्क़ के जाल में नया-नया फँसा है। पुराने और तजुर्बेकार आशिक़ तो अच्छी तरह जानते हैं कि हुस्न वालों के वादे जितने दिलकश होते हैं, अक्सर उतने ही झूठे और कच्चे भी साबित होते हैं।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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