बाक़ी रहेगा जौर-ओ-सितम रोज़-ए-हश्र लग तुझ ज़ुल्फ़ की जफ़ा में निपट इम्तिदाद है

“Torment and cruelty shall endure until the Day of Doom; boundless indeed is the stretch in the malice of your dark tresses.”

— वली दकनी
अर्थ

ज़ुल्म और सितम क़यामत के दिन तक बाक़ी रहेगा, क्योंकि तुम्हारी ज़ुल्फ़ों की बेवफ़ाई और सितम में बहुत ज़्यादा फैलाव और लंबाई है।

विस्तार

इस शेर में शायर ने महबूब की लंबी ज़ुल्फ़ों और अपने कभी न ख़त्म होने वाले दर्द के बीच एक अनोखा रिश्ता बाँधा है। ज़ुल्फ़ें जितनी लंबी और फैली हुई हैं, आशिक़ को लगता है कि उनसे मिलने वाले सितम का विस्तार भी उतना ही असीमित है, जो क़यामत के दिन तक चलेगा। यह उस बेबस आशिक़ का दर्द है, जिसके लिए महबूब की एक अदा ही उम्र भर की मीठी सज़ा बन गई है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

ऑडियो

पाठUnavailable
हिंदी अर्थUnavailable
अंग्रेज़ी अर्थUnavailable
हिंदी विस्तारUnavailable
अंग्रेज़ी विस्तारUnavailable
Comments · 0

Free — just your email. You'll come right back here.

No comments yet. Be the first.