दिल चला है इश्क़ का हो जौहरी लब तिरे ला'ल-ए-बदख़्शाँ बूझ कर

“My heart has set out to be love's jeweler, taking your lips to be the rubies of Badakhshan.”

— वली दकनी
अर्थ

मेरा दिल तुम्हारे होंठों को बदख़्शाँ के लाल समझकर इश्क़ का जौहरी बनने के लिए चल पड़ा है।

विस्तार

यहाँ शायर ने अपने दिल को इश्क़ का एक पारखी जौहरी बना दिया है, जो सबसे अनमोल सौंदर्य की पहचान रखता है। इतिहास में बदख़्शाँ के लाल (रूबी) अपनी बेमिसाल चमक और कीमती होने के लिए मशहूर थे, और आशिक़ अपने महबूब के सुर्ख़ होठों को वही दुर्लभ नगीना समझ बैठा है। यह शेर बड़ी नज़ाकत से दिखाता है कि मोहब्बत में दिल किस तरह महबूब के हुस्न को दुनिया की सबसे बड़ी दौलत मानकर उस पर फ़िदा हो जाता है।

Interpretation note: meanings and explanations may be AI-assisted and should not replace a primary text or scholarly edition. See the editorial policy.

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